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क्या बिछड़ जायेगा लालू-राबड़ी का “दो हंसों का जोड़ा ?” … बड़े भाई तेजप्रताप को, छोटे भाई तेजस्वी ने दे डाली अनुशासन में रहने की नसीहत

लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव का गुस्सा, कई बार मिडिया की सुर्ख़ियों में छाया रहा है. इधर तेजप्रताप यादव लगातार अपने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर हमलावर दिखे. आज शुक्रवार को भी उनका गुस्सा थमता हुआ नहीं दिखा. लेकिन आज उन्होंने राबड़ी आवास के बाहर जिस तरह का बयान दिया, उससे उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव नाराज हैं. उनकी नाराजगी उनके बयान से साफ झलक रही है. सोनिया गांधी द्वारा आहूत “ऑल ऑपोजिशन पार्टी मीटिंग” खत्म होने के बाद राबड़ी आवास से बाहर निकले तेजस्वी से मीडिया ने जब तेजप्रताप के आरोपों और आक्रोश के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा-“वो बड़े भाई हैं, बोलते हैं. लेकिन थोड़ा अनुशासन जरूरी है”

तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा-“तेज प्रताप यादव आए थे, मुलाकात हुई थी. सभी को पता है कि 4:30 बजे शाम में मुझे सोनिया गांधी द्वारा आहूत मीटिंग में शामिल होना था. अब मीटिंग बुलाई जाएगी तो शामिल तो होना ही पड़ेगा ना. जो बातें तेज प्रताप ने कह दी वो ठीक है. बड़े भाई हैं हमारे. लेकिन पार्टी में शामिल लोगों को हमारे माता-पिता ने एक बात जरूर सिखाई है, हमारे संस्कार में ये दिया गया है कि बड़ों की इज्जत करो, सम्मान करो. थोड़ा अनुशासन में भी रहो. नाराजगी होते रहती है”

जब तेजस्वी यादव से दिल्ली जाने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा-“सभी को पता है कि 22 तारीख को रक्षाबंधन है और मेरी छह बहनें दिल्ली एनसीआर में रहती हैं. वहीं, 23 को जातीय जनगणना पर बात करने के लिए सभी दल के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री से मिलना है. तो जाहिर है कि मैं दिल्ली जाऊंगा ही” ….. इतना कहते हुए तेजस्वी कार में बैठ कर निकल गए.

जगदानंद सिंह के बाद, अब तेजप्रताप ने संजय यादव पर लगाए आरोप

आज शुक्रवार को तेजप्रताप अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव से मिलने राबड़ी आवास पहुंचे. मिलने का मकसद बीते दिनों हुए घटनाओं के संबंध में बातचीत करना था. लेकिन आवास के अंदर जाने के थोड़ी ही देर बाद वो तमतमाए हुए बाहर निकले और पत्रकारों से कहा कि संजय यादव जो तेजस्वी के करीबी मानें जाते हैं ने उन्हें तेजस्वी से मिलकर बातचीत नहीं करने दी है.

अब कुल मिलकर जो स्थिति दिख रही है, उसको देखते हुए इतना तो साफतौर पर जाहिर हो ही रहा है की लालू के परिवार में ही नहीं बल्कि लालू के पार्टी में भी खींचतान की स्थिति कायम है. लालू यादव भले ही इस खिंचतान को बच्चों का झगडा कहकर अपना पल्ला झड़ने की कोशिश करें या पार्टी में कार्यकर्ताओं को All is Well का सन्देश दें, लेकिन सच यही है की लालू के दोनों बेटों के बिच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ चुकी है. ये लड़ाई कब तक रहेगी, कहाँ तक जाएगी, ये अभी कहना मुश्किल है लेकिन संभव है की आने वाले दिनों में तेजप्रताप यादव को कोई बेहतर विकल्प दिख जाए तो रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा की तरह राजद भी दो फांड़ में बंटता हुआ नजर आये.

तेजप्रताप को हल्के में लेना भी लालू परिवार के लिए बड़ी भूल साबित हो सकती है. ये मामला रावण और विभीषण की तरह होता हुआ दिख सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि राजद में दो तरह के कार्यकर्त्ता हैं. ऐसे कार्यकर्त्ता जो जोश और रोष में काम करते हैं, उनका पसंदीदा नेता तेजप्रताप यादव हैं और इस खेमे में अधिकांशतः छात्र जुड़े हैं. दूसरी तरफ जो तेजस्वी यादव को पसंद करने वाले कार्यकर्त्ता हैं, वो सियासी कार्यकर्त्ता हैं जो सोच-समझ कर आगे बढ़ते हैं. अब देखना ये है की आने वाले समय में रोष-जोश वाले कार्यकर्त्ता अपने तेजप्रताप के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए कौन सा रुख अपनाने की सलाह अपने नेता तेजप्रताप को देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि तेजप्रताप की कार्यशैली कुछ इस तरह की है कि वो अपने साथी कार्यकर्ताओं की सलाह पर ही अपनी रणनिति तैयार करते हैं. कभी भड़कते हैं, कभी संभलते हैं.

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