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इंटरनेट धोखाधड़ी और फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए, Google ने लॉन्च किया “सेफ्टी सेंटर”

इंटरनेट आया तो कई सुविधाएं साथ लाया. कोरोना महामारी के काल में इंटरनेट का प्रयोग भी विस्तृत हुआ. अब ये केवल मनोरंजन का माध्यम ही नहीं बल्कि जानकारियों और शिक्षा का सशक्त माध्यम बनता हुआ दिखने लगा. लेकिन इसी के साथ ही इंटरनेट के माध्यम से धोखाघड़ी, झूठी ख़बरों और जानकारियों, अफवाहों को फैलाने का काम भी धड़ल्ले से हो रहा है.

इंटरनेट का गलत उपयोग न हो, इसी को देखते हुए टेक कंपनियों का जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि यूजर की डाटा की सुरक्षा करें, यूजर को धोखाघड़ी से बचाएं और फेक न्यूज़ पर लगाम लगाएं. गूगल भी कई बार कह चुका है कि वह अपने यूजर्स के डाटा की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए प्रतिबद्ध है और इसे बरकरार रखने के लिए लगातार कदम उठाए हैं. 

अब एक बार फिर कोविड महामारी के कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म में तेजी को देखते हुए गूगल इंडिया ने ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ाने के लिए नई पहलों और कार्यक्रमों की घोषणा की है। गूगल ने भारत में अपनी ट्रस्ट और सुरक्षा टीमों में संसाधनों का विस्तार किया है और ये आठ भारतीय भाषाओं में होंगे.

इसके अलावा कंपनी ने बच्चों के साथ-साथ माता-पिता के लिए इंटरनेट सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाले शैक्षिक कार्यक्रम लाने का भी फैसला किया है. साथ ही इंटरनेट की दिग्गज कंपनी ने लोकप्रिय कॉमिक बुक पात्रों के माध्यम से बच्चों को महत्वपूर्ण इंटरनेट सुरक्षा सबक सिखाने के लिए अमर चित्र कथा के साथ हाथ मिलाया है.

गूगल ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कम्पनी के पास दुनिया भर में फैली ट्रस्ट और सुरक्षा टीमें हैं जो तकनीक में निपुण हैं और वे ऑनलाइन नुकसान की पहचान करने, लड़ने और रोकने के लिए काम करती हैं. साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए 10 से अधिक स्थानीय भाषाओं को जोड़ा गया है.

गूगल का मानना है कि संसाधन में बढ़ोतरी से गलत सूचना, धोखाधड़ी, बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरे, हिंसक उग्रवाद, फिशिंग हमलों और मैलवेयर जैसे बड़े मुद्दों से निपटने में मदद मिलेगी.

कंपनी ने गूगल सेफ्टी सेंटर भी लॉन्च किया है. यह सेंटर हिंदी, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं के साथ लाइव हो गया है. 2021 के अंत तक यह फीचर, बंगाली, गुजराती और तमिल में भी आ जाने की उम्मीद है ताकि इन भाषाओँ के लोग भी जागरूक और सुरक्षित हो सकें.

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