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तालिबान के प्रवक्‍ता जबीउल्‍लाह मुजाहिद ने-“पाकिस्‍तान हमारे दुसरे घर जैसा, करेंगे पाकिस्तान के हित की रक्षा”

चीन की साजिश और पाकिस्‍तान के सियासत, आतंकियों और सेना की मदद से तालिबान ने अफगानिस्‍तान की सत्ता हासिल कर लिया है और खुलकर पाकिस्‍तान के साथ अपने बेहतर रिश्‍तों का खुलासा भी कर दिया है. अब ऐसे में तालिबान और भारत के रिश्ते कैसे होंगे ? ये भारत सरकार के लिए जटिल रणनीति बनाने जैसा साबित होगा.

तालिबान के प्रवक्‍ता जबीउल्‍लाह मुजाहिद ने कल बुधवार को कहा कि हम पाकिस्‍तान को अपने दूसरे घर की तरह से मानते हैं. साथ ही जबीउल्लाह ने यह भी कहा कि हम ऐसी किसी गतिविधियों को अपनी जमीन पर अनुमति नहीं देंगे जो पाकिस्‍तान के हितों के खिलाफ है.

जबीउल्‍लाह ने एक पाकिस्‍तानी टीवी चैनल से कहा कि हमारे काबुल में घुसने के 12 दिन हो गए हैं और हमने सभी इलाकों पर अपना नियंत्रण स्‍थापित कर लिया है. इन जगहों पर शांति और स्थिरता आ रही है. तालिबान प्रवक्‍ता ने कहा कि अफगानिस्‍तान में सभी महिलाओं को इस्‍लाम पर आधारित अधिकार दिए जाएंगे. इसमें नौकरी और शिक्षा शामिल है. जबीउल्‍लाह ने कहा कि सरकार बनने के बाद टैक्‍स कलेक्‍शन बढ़ाने पर काम किया जाएगा.

अफगानिस्तान में सरकार बनाने के मुद्दे पर जबीउल्‍लाह ने कहा कि हम अफगानिस्‍तान में ऐसी सरकार चाहते हैं जो मजबूत हो और इस्‍लाम पर आधारित हो. इसमें सभी अफगान शामिल हों. हम इस पर काम कर रहे हैं और तब तक इंतजार कर रहे हैं, जब तक कि हम एक मजबूत और स्‍थायी सरकार बनाने में सफल हो जाएं. पाकिस्‍तान के आतंकी संगठन टीटीपी के बारे में तालिबान ने कहा कि हम अपनी जमीन का इस्‍तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं करने देंगे.

भारत और पाकिस्‍तान विवाद पर मुजाहिद ने कहा कि भारत और पाकिस्‍तान को एक साथ बैठकर सभी विवादित मुद्दों का समाधान करना चाहिए. नई दिल्‍ली को भी कश्‍मीर पर सकारात्‍मक रुख अपनाना चाहिए. मुजाहिद ने भारत को इलाके का एक अहम मुल्‍क करार देते हुए अच्‍छे रिश्‍ते बनाने की इच्‍छा जताई है.

तालिबान प्रवक्‍ता मुजाहिद ने कहा कि हम सभी देशों के साथ अच्‍छे रिश्‍ते बनाना चाहते हैं. इसमें भारत भी शामिल है जो इस इलाके का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है. हमारी इच्‍छा है कि भारत अफगान जनता की राय के मुताबिक अपनी नीतियां बनाए. हम अपनी सरजमीं को किसी मुल्‍क के खिलाफ इस्‍तेमाल नहीं करने देंगे. भारत और पाकिस्‍तान को चाहिए वे अपने द्विपक्षीय मामले सुलझाएं.

अगर देखा जाए तो तालिबान प्रवक्ता जबीउल्‍लाह ने बड़ा ही उलझा-पुलझा बयान दिया है, जिसमें भारत-पाकिस्तान को लेकर उसकी निति सुस्पष्ट नहीं कही जा सकती है. एक तरफ वो भारत से बेहतर रिश्ते की उम्मीद भी कर रहा है, दूसरी तरफ वो पाकिस्तान के हित की रक्षा की बात भी कर रहा है. अगर देखा जाए तो उसने कश्मीर मुद्दे पर भारत को सकारात्मक रुख अपनाने की नसीहत भी दे डाली है और दूसरी तरफ वो भारत और पाकिस्तान के मामले को द्विपक्षीय मामला भी करार देते हुए, खुद को उस मामले से अलग रखने के संकेत भी दे रहा है. आखिरकार तालिबान भारत के साथ कैसे रिश्ते रखना चाहता है और कश्मीर मामले में उसकी पहल पाकिस्तान की तरफ से किस हद तक होगी यह पूरी तरह से अँधेरे में है. स्थितियां संभवतः तब सुस्पष्ट होंगी जब तालिबान और भारत की बातचित शुरू होगी.

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