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शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए CBSE ने तय किया बोर्ड परीक्षा का नया पैटर्न, अब दो सेमेस्टर में होंगे इक्जाम

कोरोना महामारी के मद्देनजर, सत्र 2020-21 हेतु CBSE ने अफरा-तफरी की स्थिति में परीक्षा परिणाम को घोषित किया. इस परीक्षा परिणाम हेतु जो नियमावली बनी, उस नियमावली में सीबीएसई के द्वारा एक विकल्प यह भी दिया गया कि जो परीक्षार्थ, घोषित रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं, वे ऑफलाइन परीक्षा दे सकते हैं. वर्तमान में ऐसे परीक्षार्थियों की परीक्षा शुरू कर दी गयी है, जिन्होंने घोषित रिजल्ट के प्रति अपनी असंतुष्टि व्यक्त की थी.

सत्र 2021-22 हेतु सीबीएसई बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा की नई नियमावली के तहत जो परीक्षा के नए नियम और पैटर्न का निर्धारण किया गया है, वो छात्रों की सुविधा को देखते हुए एवं कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए बनाया गया है. जिससे की परीक्षार्थियों, स्कूलों एवं बोर्ड को परीक्षा के कारण किसी तरह की असुविधा न हो, समस्या न हो और अंतिम समय में अफरा-तफरी की स्थिति न पैदा हो. इन नए नियमों के बारे में परीक्षार्थियों में कोई भ्रम-भ्रांति की स्थिति न हो, इसलिए निम्नांकित रूप में परीक्षा के नए पैटर्न को विस्तार से समझाया जा रहा है.

सीबीएसई सत्र 2021-22 सेशन के लिए, कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए *स्पेशल असेसमेंट स्कीम* जारी कर दी है. यह नई स्कीम देश में कोविड-19 की स्थिति के कारण 2020-21 में बोर्ड के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए जारी की गई है.

दो भागों में बांटा गया है सिलेबस

सीबीएसई के निदेशक (एकेडमिक) जोसेफ इमैनुएल के एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, “केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की शैक्षणिक सत्र 2021-2022 के लिए स्पेशल असेसमेंट स्कीम के तहत सिलेबस को दो भागों में बांटा जाएगा. इसके लिए विषयों के विशेषज्ञों की सहायता ली जाएगी. 50-50 प्रतिशत सिलेबस के अनुसार पहले टर्म की परीक्षा नवंबर-दिसंबर में जबकि दूसरी टर्म की परीक्षा मार्च-अप्रैल में आयोजित की जाएंगी”

उन्होंने कहा कि ‘‘पाठ्य्रकम को दो हिस्सों में बांटे जाने के आधार पर प्रत्येक टर्म के अंत में बोर्ड परीक्षाएं कराएगा. शिक्षण सत्र के अंत में बोर्ड द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं कराने की संभावनाओं को बढ़ाने के लक्ष्य से ऐसा किया गया है.’’ इसके साथ ही इंटरनल असेसमेंट और प्रोजेक्ट के काम को ज्यादा “क्रेडिबल” और “वैलिड” बनाने के लिए सीबीएसई के द्वारा व्यवस्था एवं योजना की भी घोषणा की गई है.

टर्म 1 की परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर 2021 में होंगी

गौरतलब है कि टर्म I की परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर 2021 में आयोजित की जानी हैं, और इसमें मल्टीपल च्वाइस प्रश्न (MCQ) होंगे, जो रैशनलाइजिंग सिलेबस के केवल पहले भाग यानी पहले सेमेस्टर को कवर करेंगे. ये परीक्षाएं 90 मिनट की अवधि की होंगी. सीबीएसई बोर्ड प्रश्न पत्रों और मार्किंग स्कीम को स्कूलों को भेजेगा, जो बाहरी परीक्षकों और पर्यवेक्षकों की देखरेख में परीक्षा आयोजित करेंगे और परिणाम सीबीएसई बोर्ड को भेजेंगे.

टर्म II की परीक्षाएं मार्च-अप्रैल 2022 में होंगी

टर्म II की परीक्षाएं बोर्ड द्वारा निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर मार्च-अप्रैल 2022 में आयोजित की जानी हैं. ये परीक्षा विभिन्न फॉर्मेट में प्रश्नों के साथ दो घंटे के पेपर के रूप में होंगे. लेकिन यही एक बात गौर करने की है कि “यदि स्थिति सामान्य डिस्क्रिप्टिव एग्जामिनेशन के लिए अनुकूल नहीं होगी, तो टर्म II परीक्षा भी 90 मिनट के एमसीक्यू पेपर के रूप में ही आयोजित की जाएगी.

दोनों टर्म के परीक्षा परिणाम को जोड़कर बनेगा फाइनल रिजल्ट

गौरतलब हो कि फाइनल परीक्षा परिणाम, दोनों टर्म-एंड परीक्षाओं के परिणाम को जोड़कर तैयार किया जाएगा. इससे एक बात पूर्ण रूप से स्पष्ट है कि बोर्ड के फाइनल परीक्षा में पहले की तरह पुरे साल के सिलेबस से प्रश्न नहीं आयेंगे बल्कि दोनों टर्म के परीक्षाओं में प्राप्तांक को जोड़कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाएगा. प्रथम टर्म के लिए जो चैप्टर निर्धारित हैं, परीक्षार्थियों को पहले टर्म के लिए उन्हीं चैप्टर पर ध्यान केन्द्रित करना होगा. दुसरे टर्म की परीक्षा में जो चैप्टर निर्धारित होंगे, उसके लिए उन्हीं चैप्टर पर ध्यान केन्द्रित करना होगा.

सीबीएसई बोर्ड ने सत्र 2021-22 के बोर्ड परीक्षा के लिए, कोरोना महामारी के मद्देनजर चार विकल्पों की एक बकेट बनाई है, जिसमें चार विकल्प के माध्यम से परीक्षा को बेहतर तौर-तरीके से आयोजित करने और कराने का नियम तैयार किया गया है. इन विकल्पों के बारे में परीक्षार्थियों को बेहतर जानकारी होना जरुरी है ताकि वो इसके अनुरूप ही अपनी तैयारी को सुदृढ़ कर सकें.

सीबीएसई ने 4 ऑप्शन दिए हैं

  1. यदि दोनों टर्म एंड एग्जाम सेंटर्स पर आयोजित की जा सकती हैं, तो दोनों परीक्षाओं के बीच थ्योरी के मार्क्स समान रूप से डिस्ट्रिब्यूट किए जाएंगे.
  2. यदि टर्म I परीक्षा के समय स्कूल बंद करना पड़ता है और छात्रों को अपने घरों से ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा लिखनी होती है, लेकिन टर्म II की परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा सकती हैं, तो ऐसी स्थिति में टर्म I परीक्षा की वेटेज को फाइनल स्कोर के लिए कम कर दिया जाएगा और फाइनल रिजल्स की घोषणा के लिए टर्म II परीक्षा का वेटेज बढ़ाया जाएगा.
  3. अगर टर्म I की परीक्षाएं स्कूल में आयोजित की जाती हैं, लेकिन टर्म II की परीक्षाएं केंद्र में आयोजित नहीं की जा सकती हैं और छात्र इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन देते हैं तो ऐसी स्थिति में परिणाम टर्म I MCQ में छात्रों के प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन पर आधारित होंगे. ईयर एंड रिजल्ट के लिए टर्म I परीक्षा के अंकों का वेटेज बढ़ाया जाएगा.
  4. यदि स्कूलों या केंद्रों में कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकती है, तो रिजल्ट की गणना आंतरिक मूल्यांकन और प्रैक्टिकल के आधार पर की जाएगी

गौरतलब है कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 हेतु जो बोर्ड परीक्षा की नियमावली बनी है, उस नियमावली का विरोध भी कुछ छात्र एवं अभिभावक कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है की टर्म-1 में मल्टीपल च्वाइस प्रश्न (MCQ) का जो विकल्प दिया गया है, उसमें निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था बनाया जाना जरुरी है ताकि इस विकल्प के तहत “अन्दाजी टक्कर” वाली स्थिति के परीक्षार्थी भी सफल होकर, वास्तविक रूप से मेहनत करने वाले छात्रों के समकक्ष न आ पायें. इस विषय में सीबीएसई का क्या निर्णय होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

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