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पंजशीर के इलाके में तालिबानिओं और अहमद मसूद के लड़ाकों के बिच भीषण युद्ध की स्थिति

अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्ज़ा तो कर लिया लेकिन आज भी पंजशीर का इलाका उसके कब्जे से बाहर है. यह दुर्गम इलाका पहले भी तालिबानियों की पहुँच से बाहर रहा है और यहाँ तालिबान की खिलाफत वाले लाखों लड़ाके मौजूद हैं.  तालिबान आतंकियों ने एक बार फिर से तालिबान विद्रोहियों के गढ़ पंजशीर घाटी पर भीषण हमला बोला है. बताया जा रहा है कि पंजशीर घाटी के अंतर्गत आने वाले परवान प्रांत के जबल सराज जिले में तालिबानी आतंकियों ने ये हमले शुरू किए हैं. यह ताजा हमला मंगलवार रात को शुरू हुआ है और अभी भी जारी है. इस हमले में दोनों ही पक्षों के कई लोग हताहत हुए हैं.

अफगान मीडिया के अनुसार बघलान प्रांत के अंदराब जिलो में भी संघर्ष की खबरें आ रही हैं. तालिबान ने इस इलाके में इंटरनेट को बंद कर दिया है जिससे मरने वालों की संख्‍या की पुष्टि नहीं हो पा रही है. तालिबानी आतंकी किसी भी तरह से पंजशीर घाटी में घुसना चाहते हैं ताकि अहमद मसूद के किले पर फतह हासिल किया जा सके लेकिन उन्‍हें जोरदार पलटवार का सामना करना पड़ रहा है.

तालिबान ने गुलबहार इलाके में रास्‍ता भी रोक दिया है. इससे पहले अफगानिस्‍तान में विद्रोहियों के गढ़ पंजशीर घाटी को कई दिनों से घेरकर बैठे तालिबानी आतंकियों ने लगातार हार मिलने के बाद नॉर्दन एलायंस के नेता अहमद मसूद को धमकी दे डाली थी. तालिबान ने कहा है कि विद्रोहियों को अपने खून से इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.

पंजशीर घाटी में अहमद मसूद के सैनिकों ने तालिबान को धूल चटाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. यही नहीं इन लड़ाकुओं को ट्रेनिंग का काम लगातार जारी है. अमेरिकी सेनाओं के वापस जाने के बाद तालिबान ने अपने आक्रामक अभियान को तेज कर दिया है. पंजशीर घाटी अफगानिस्‍तान की राजधानी काबुल से 150 किमी दूर है और यहां पर एक लाख लोग रहते हैं. पंजशीर के नेता और अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद ने कहा है, ‘मैं पंजशीर की घाटी से आज लिख रहा हूं और अपने पिता के नक्‍शे कदम पर चलने को तैयार हूं। मेरे साथ मुजाहिद्दीन लड़ाके हैं जो एक बार फिर से तालिबान के साथ संघर्ष के लिए तैयार हैं।

अगर देखा जाए तो अफगानिस्तान में होने वाले हिंसक और युद्ध जैसी स्थिति के लिए UNSC पूरी तरह से जिम्मेवार है. जब अफगानिस्तान में तालिबान का कब्ज़ा हुआ था तो पंजशीर के इलाके उसके कब्जे में नहीं आये क्योंकि इस इलाके में अहमद मसूद और सालेह का कब्जा कायम है. तालिबानियों का कट्टर विरोधी रहा है पंजशीर का इलाका. UNSC को चाहिए था कि अमेरिकी सेना की वापसी से पहले, पंजशीर की स्वायत्तता के बारे में ठोस निर्णय लिया जाए. इस इलाके को अमेरिका एवं अन्य देश जो आतंकवाद के खिलाफ आवाजें उठाते रहे हैं, वो अपना सैन्य-बेस के रूप में इस्तमाल कर, तालिबान के लिए चेतावनी बन सकते थे. लेकिन UNSC ने अभी तक इस निर्णय तक नहीं पहुंची है. अगर तालिबान की इंट्री पंजशीर में हुयी तो ये मान कर चलिए की वहाँ लाखों की संख्या में लोग मारे जायेंगे.

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