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ईराक के किरकुक चेक-पॉइंट पर, ISIS ने दिया आतंकी घटना को अंजाम, 13 सुरक्षाकर्मियों की मौत

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से, आतंकी संगठनों का मनोबल बढ़ता हुआ नजर आने लगा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये पहली बार हुआ है कि किसी आतंकी संगठन ने पुरे देश पर कब्ज़ा कर के, अपनी सरकार बनाने का काम किया है. दुनिया के कई देश, जो दुनिया में आतंकवाद को ख़त्म करने की कसमें खा रहे थे, उन्हीं में से कई देश अपनी निजी स्वार्थ के कारण, तालिबान जैसे आतंकी संगठन के द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे को “सरकार” की मान्यता देने से परहेज करते नहीं दिख रहे.

दुनिया के खतरनाक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इराक के किरकुक शहर के एक चेकपाइंट पर घातक हमला किया है. इस हमले में 13 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई है. उत्तरी इराक में किरकुक शहर के पास आइएसआइएस ने एक चेकपाइंट पर हमला कर दिया है. इस हमले में अब तक 13 पुलिस जवानों की मौत की खबर है. हाल में आईएसआईएस के हमलों में अचानक बढ़त देखने को मिली है.

इराक की सरकार ने साल 2017 के अंत में कहा था कि उसने आतंकी संगठन आईएसआईएस को हरा दिया है, लेकिन ISIS के पास स्लीपर सेल हैं जो सुरक्षा बलों पर लगातार हमले कर रहे हैं. आतंकी उत्तरी इराक में नियमित रूप से इराकी सेना और पुलिस को निशाना बना रहे हैं, लेकिन यह हमला इस साल के सबसे घातक हमलों में से एक है. इससे पहले 19 जुलाई को आईएसआईएस ने सादर शहर के अल-वोहेलात बाजार पर हमला किया था और आधिकारिक रूप से इसकी जिम्मेदारी भी ली थी. इस हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी.

इराक में अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन सैनिकों की संख्या वर्तमान में लगभग 3,500 है, जिनमें से 2,500 अमेरिकी सैनिक हैं. ये सभी सैनिक आईएसआईएस को हराने की कोशिशों में जुटे हैं. लेकिन अमेरिका की सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि वह इस देश से अपने सैनिकों की मौजूदगी को कम करेगा. जिसके बाद अमेरिकी सेना का काम केवल इराकी सुरक्षाबलों को प्रशिक्षण और सलाह देना होगा. बीते रविवार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इराकी कुर्दिस्तान का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने इराक और सीरिया दोनों जगह ISIS के ‘फिर से सिर उठाने’ को लेकर चिंता जताई थी.

चाहे बात अफगानिस्तान की हो या फिर ईराक की, अमेरिका की इन देशों में जो भूमिका थी, अब वो भूमिका खात्मे की कगार पर दिख रही है. अफगानिस्तान से तो अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने, अमेरिका को शर्मसार किया ही है, अब ईराक में भी अगर अमेरिका की भूमिका सिमित रह जाती है तो ये स्थिति अमेरिका की संदिग्ध नियत पर सवालिया निशान खड़े करती हुयी दिखेगी. अगर देखा जाए तो ईराक में अमेरिका के द्वारा अपनी भूमिका को सिमित किया गया है तो एक तरह से यह कहा जा सकता है कि अफगानिस्तान के बाद शायद अब ईराक से भी अमेरिकी सैनिकों की वापसी की राह खुलने वाली है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आज जो अफगानिस्तान का हाल है, वहां तालिबानियों का कब्ज़ा है, तो क्या आने वाले समय में ईराक का भी हाल अफगानिस्तान की तरह होगा और वहाँ ISIS का कब्ज़ा होगा ? इस सवाल का जवाब जो भी हो लेकिन अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से दुनिया में अमेरिका का वर्चस्व तेजी से घटता हुआ नजर आएगा.

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