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मोदी सरकार के एथेनॉल निति से, सस्ता होगा पेट्रोल लेकिन चीनी की कीमतों में होगी कड़वाहट

पेट्रोल/डीजल की कीमतों में पिछले दिनों बेतहाशा वृद्धि की देखते हुए, केंद्र सरकार ने एथेनॉल निति पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है ताकि एथेनॉल को वैकल्पिक फ्यूल के रूप में यथाशीघ्र इस्तमाल के लायक बनाया जा सके. मोदी सरकार ने पिछले शुक्रवार को चीनी मिलों को एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का उपयोग को बढ़ावा देने को लेकर प्रोत्साहन नीति की घोषणा भी कर दी है. लेकिन इस घोषणा के साथ ही इस बात की संभावना भी बढ़ गयी है की आने वाले समय में चीनी की बढती हुयी कीमत कड़वाहट ला सकती है. अगर ऐसा होता है तो गरीब लोगों की थाली से चीनी ओझल होती हुयी दिख सकती है.

सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए एक समयबद्ध योजना तैयार की है और उसी हिसाब से चीनी बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दे रही है. 100 किलो गन्ने को पेरने से 60 लीटर तक एथेनॉल प्राप्त होता है. इस प्रकार एक टन गन्ने से चीनी मिलें 115 किलो चीनी और 45 किलो शीरा का उत्पादन कर सकती हैं, जो 10.8 लीटर एथेनॉल देता है. एथेनॉल 99 प्रतिशत से अधिक शुद्धता का एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल के साथ मिलाया जा रहा है. एथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, चीनी कंपनियों की एथेनॉल भंडारण क्षमता को लगभग 300 करोड़ लीटर के मौजूदा स्तर से तीन गुना तक बढ़ाने की आवश्यकता होगी.

मोदी सरकार अपनी प्रोत्साहन नीति के तहत इस महीने से एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का हस्तांतरण करने वाली चीनी मिलों को उनके नियमित कोटे के अलावा मासिक घरेलू बिक्री के लिए हस्तांतरित गन्ने की मात्रा के बराबर चीनी कोटा का आबंटन किया जाएगा. देश में चीनी की मांग-आपूर्ति की स्थिति को बनाए रखने, चीनी की पूर्व-मिल कीमतों को स्थिर करने और घरेलू खपत के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जून 2018 से मिल-वार मासिक चीनी कोटा तय कर रही है.

भारत सरकार साल 2025 तक पेट्रोल में 20 फ़ीसदी एथेनॉल मिलाने का टार्गेट लेकर चल रही है और इस हिसाब से कंपनियों को इसका प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल जून में कहा था कि पहले सरकार ने साल 2030 तक के लिए 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग की यह योजना बनाई थी लेकिन इसे और पहले खिसका कर 2025 कर दिया है. सरकार ने 11 सेक्टर की पहचान की है जो अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर मॉडर्न टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर इसकी रीसाइक्लिंग कर सकते हैं.

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ‘‘बी-हेवी मोलेसेज’/गन्ना के रस/चीनी सिरप/चीनी से एथनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग किये गये चीनी पर प्रोत्साहन उनके मासिक रिलीज कोटा में अक्टूबर 2021 से दोगुना कर दिया गया है.’’ यह एथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त गन्ना/चीनी का उपयोग करने वाले चीनी मिलों को प्रोत्साहित करने तथा ‘पेट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम’ के अनुरूप पेट्रोल के साथ एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए के लिए किया गया है.

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