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लता मंगेशकर का निधन, कोरोना के हमले से संगीत की दुनिया को अपूरणीय क्षति

बेशक बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याएं लता पर धीरे-धीर हावी हो रहे थे, लेकिन 92 साल की उम्र में भी वो उनका सामना कर रही थीं। लेकिन कोरोना वायरस ने उन्हें नहीं बख्शा। लता को 8 जनवरी को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मुंबई में ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बतया जा रहा है कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले दो सालों से वो घर से नहीं निकल रही थे। बताया जा रहा है कि उनके घर का कोई स्टाफ पॉजिटिव पाया गया था जिसके बाद वो भी कोरोना की चपेट में आ गई।

एक तो उम्र का तकाजा और ऊपर से कुछ न कुछ हेल्थ इशूज, यही वजह है कि लता मंगेशकर काफी बीमार हो गईं थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लता मंगेशकर पिछली बार जब बीमार पड़ीं, तो कई दिन अस्पताल में गुजारने पड़े और उसी के बाद से उन्होंने सबसे मिलना-जुलना बंद किया हुआ है। बताया जाता है कि उन्हें इंफेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है। यही वजह थी कि पिछली बार हॉस्पिटल से आने के बाद वो अपने कमरे में ही रहती थीं किसी से नहीं मिलती थी।

लता मंगेशकर को कोरोना वायरस के साथ निमोनिया भी था। डॉक्टर प्रतीक समधानी ने एक हेल्थ अपडेट में बताया था कि लता मंगेशकर कोरोना वायरस के साथ निमोनिया से भी जूझ रही हैं। कोरोना के निमोनिया होना अपने अप में एक खतरनाक स्थिति है। जाहिर है कोरोना और निमोनिया दोनों स्थितियां फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती हैं।

लता मंगेशकर को साल 2019 में नवंबर महीने में सांस लेने में तकलीफ हुई थी। तब भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। हालांकि, सेहत में सुधार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। बता दें कि उस समय भी देश कोविड से जूझ रहा था। लता मंगेशकर पिछले कुछ वर्षों से उम्र संबंधी कई परेशानियों से जूझ रहीं थी। आठ जनवरी को जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो रिपोर्ट में पता चला था कि वो कोरोना के साथ-साथ निमोनिया से भी पीड़ित थीं। इससे पहले लता मंगेशकर को सांस लेने में तकलीफ और इंफेक्शन की शिकायत थी।

डॉक्टर्स के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक लता मंगेशकर की मौत मल्टीपल ऑर्गन फेलियर (Multiple organ failure) की वजह से हुई है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज के शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ जाता है। इससे शरीर में सूजन आ जाती है और खून के थक्के भी बनने लगते हैं। इसमें शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाते हैं। इनके अलावा इसके लक्षणों में पहले 24 घंटों में लो ग्रेड फीवर, tachycardia, and tachypnea शामिल हैं। अगले 24-72 घंटों के भीतर, फेफड़े की विफलता शुरू हो सकती है। इसके बाद बैक्टरेरिया, साथ ही गुर्दे, आंतों और यकृत की विफलता हो सकती है।

अस्पताल में भर्ती होने के कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत में सुधार भी होने लगा था लेकिन कुछ दिनों पहले उनकी सेहत ज्यादा गंभीर होने लगी, जिसके चलते उन्हें आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखा हुआ था। फैंस उसी समय से डरे हुए थे और उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे थे। अब उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

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